उधारी से बड़ी इंसानियत“कुछ कर्ज़ पैसों के होते हैं… और कुछ कर्ज़ इंसानियत के।” प्रस्तावनाकभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर खड़ा कर देती है, जहाँ सामने दो रास्ते होते हैं—एक रास्ता कहता है, “मेरे पैसे वापस करो।”और दूसरा रास्ता धीरे से पूछता है—“क्या इस समय तुम्हारे पैसे से ज्यादा किसी की जिंदगी जरूरी है?”पैसा वापस मिल जाए तो जेब भरती है,लेकिन किसी की जिंदगी बच जाए तो आत्मा भर जाती है।यह कहानी है माधव देशमुख की…एक ऐसे इंसान की, जिसने जिंदगी में बहुत लोगों की मदद की, लेकिन बदले में कई बार धोखा भी खाया।फिर एक दिन जिंदगी ने