भाग 1: सपनों का शहर और मासूमियतदिल्ली का सुबह का मौसम हमेशा से एक अजीब सी हकीकत और ख़्वाबों का मिश्रण रहा है। जब सूरज की पहली किरणें लाल किले की पुरानी दीवारों और लुटियंस दिल्ली के चौड़े रास्तों को छूती थीं, तब यह शहर किसी नई उम्मीद की तरह मुस्कुराता था। इसी शहर के एक कोने में स्थित 'सेंट जेवियर्स कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म' का माहौल हमेशा छात्रों की चहल-पहल, चाय की चुस्कियों और राजनीति, सिनेमा व साहित्य पर बहस से गुलज़ार रहता था।अकीरा इसी कॉलेज में जर्नलिज्म के सेकंड ईयर की छात्रा थी। वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक