कुत्रिम बुद्धिमता - 5

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                      :  प्रकरण 5  :       मांकवा से वापस आने के बाद मेरे सभी घाव भर गये थे. बदले हुए माहौल से मैं स्वस्थ महसूस कर रहा था. छुट्टिया भी ख़त्म होने वाली थी.       मैं स्कूल जाने लगा था. साथ में बीती हुई यादें दोबारा जिवंत हो गई थी. हर बार मेरे कानो में अनन्या की एक ही बात दस्तक देती रहती थी.     " I am not your lover!, "      मैं दुनियादारी से बिल्कुल अज्ञात था. मेरे पिताजी ने भी मुझे कुछ सिखाया नहीं था. जो कुछ सिखा था वह अनन्या से ही सिखा था. वह मेरे लिये मानो