खाली अलमारी का सुकून

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रविवार की सुबह थी। दिवाली पास थी, इसलिए कनु ने आज घर की बड़ी सफाई का मन बनाया था। झाड़-पोंछ के बाद उसकी नजर सालों से टाली जा रही उस अलमारी पर पड़ी, जिसका एक दरवाजा ठीक से बंद भी नहीं होता था। उसने गहरी सांस ली और अलमारी खोल दी।अलमारी जैसे सांस ले रही थी। खचाखच भरी हुई, जींस, कुर्तियां, साड़ियां, टॉप। हर कपड़े के साथ एक याद जुड़ी थी। यह लाल कुर्ती उसने पहली सैलरी से ली थी। यह नीली साड़ी भाई की शादी में पहनने के लिए। उसने एक कुर्ती निकाली, पहनने की कोशिश की, बटन खिंच