अनकहा सच ( भाग - 1)

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"अनकहा सच____""किसी अनकहे सच का पता लगाना ठीक उतना ही मुश्किल है, जितना आग की लपटों से किसी ज़िंदा इंसान को निकाल लाना..."एक ऐसे ही अनकहे सच की तलाश में था राजू।उसे खुद मालूम नहीं था कि वह किस राह पर चल रहा है। वह तो बस अपने ही विचारों में खोया हुआ था। उसे रह-रहकर लगता था कि कुछ है जो पीछे छूट रहा है—कोई ऐसी बात जो हवा में तैर रही है, पर उसकी पकड़ से बाहर है।लेकिन हकीकत में देखा जाए तो ऐसा कुछ था ही नहीं। उसके सामने सब कुछ साफ था, बिल्कुल खुली किताब की