बेटी

  • 321
  • 93

मैं एक बेटीलेखक: विजय शर्मा एरीमैं एक बेटी हूँ। बस इतना सा वाक्य है, लेकिन इसमें पूरी जिंदगी छुपी हुई है। मेरे नाम का कोई खास मतलब नहीं है, लेकिन मेरी कहानी का बहुत कुछ मतलब है। आज मैं अपनी कहानी खुद लिख रही हूँ, क्योंकि अब तक दूसरों ने ही मेरे बारे में सोचा, फैसला किया और बोला। आज मैं खुद बोलूँगी।मेरा जन्म एक छोटे से शहर में हुआ था। घर में पहले से दो भाई थे। जब माँ के पेट में मैं आई, तो घरवालों ने कहा—“अब लड़की हो जाएगी तो अच्छा रहेगा, घर में कोई तो रहेगी।”