समय का पहिया घूमता रहो। देखते-देखते घर को सगरा अनाज, धन-दौलत ओर सामान खतम हो गओ।पुरखान ने ठीकई कहो हातो—"जिस घर में कमाई को दाना न आवै ओर खर्चा की मुट्ठी रोज खुलती रहै, उस घर के भरे कोठार भी एक दिन चूहा न सही, खाली जरूर हो जात हैं।"पर रांड के संड को इन बातन की जरा-सी भी चिंता नई थी।उसके वास्ते दुनिया में दोई चीज जरूरी थीं—पेट दुउर उसकी तेल पिलाई लट्ठ।हर सवेरे उसकी बहू जैसे-तैसे कुछ जुगाड़ करके उसके लाने रोटी बना देती।रांड को संड रोटी देखके ऐसे टूट पड़ता जैसे बरसों से उपवास कर रहो हो।पेट