संगमरमर से बने उस विशाल और भव्य दरबार में जब ओजस्विनी ओझा के बूटों की आवाज गूंजी, तो वहां मौजूद हर शख्स की सांसें थम सी गईं. बडे- बडे राजनेता, खाकी वर्दी में खडे चापलूस पुलिस अधिकारी और बाबा सर्वानंद के तलवे चाटने वाले अमीर व्यापारी—सबकी नजरें उस युवा और तेजतर्रार महिला आईपीएस अधिकारी पर टिक गईं.बाबा सर्वानंद अपने सोने के पानी से रंगे सिंहासन पर बैठे- बैठे मुस्कुराने की कोशिश कर रहा था. उसकी वह मुस्कान मक्कारी और अहंकार से भरी हुई थी. उसने अपनी जिंदगी में ऐसे सैंकडों अधिकारी देखे थे जो पहले अकडकर आते थे, लेकिन उसके