बाँसुरी की धुनभाग — 11सिनाराम और उनके साथी वहाँ से जा चुके थे। पीछे रह गए थे कुछ ऐसे प्रश्न, जिनका उत्तर वर्षों से लोगों के मन में करवटें ले रहा था।रावण हेम्ब्रम और लालदा ने इतने सरल शब्दों में जीवन, धर्म, संस्कार और मनुष्य के कर्तव्य को समझाया था कि वहाँ उपस्थित लोगों की वर्षों पुरानी धर्म-जिज्ञासा जैसे कुछ देर के लिए शांत हो गई थी।उन्होंने किसी पर कोई मत थोपने का प्रयास नहीं किया था।बस इतना कहा था—धर्म केवल किसी तस्वीर के सामने दीप जलाना नहीं है।धर्म उस सत्य को अपने चरित्र में उतारना है, जिसे हम अपने