पाताल की देवी और ऋषि

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पाताल की देवी और पतित ऋषि — रहस्य का लोकपाताल की देवी और पतित ऋषिपाताललोक की वह रात पृथ्वी की रात जैसी नहीं थी।वहाँ सूर्य नहीं था, फिर भी अंधकार पूर्ण नहीं था। विशाल गुफाओं की छत से नीली और बैंगनी रोशनी की महीन धाराएँ टपकती थीं। कहीं दीवारों पर चमकते मणि-जैसे पत्थर थे, तो कहीं काले नागों के आकार की शिलाएँ, जिनसे मंद प्रकाश निकलता था। हवा में अनजाने पुष्पों की गहरी सुगंध तैर रही थी।दूर कहीं जल की धारा बह रही थी।उसकी आवाज कभी मधुर लगती, कभी ऐसी प्रतीत होती जैसे कोई बहुत दूर बैठा हुआ व्यक्ति धीमे