नौशाद ने अपनी कलाई की ड्रिप खींचकर अलग फेंकी और अपने टैक्टिकल बूट्स के तस्मे कसने लगा। अब उसके सामने दस दिन की उल्टी गिनती थी, एजेंसी उसके पीछे थी, और हमदान का खात्मा करने के लिए वह बिल्कुल अकेला था।ब्रीफकेस की राख से उठते धुएं के बीच, बराबर वाले आईसीयू केबिन से हार्ट मॉनिटर की तेज़ और लड़खड़ाती बीप गूंज उठी।नौशाद ने तुरंत उस तरफ दौड़ लगाई।स्ट्रेचर-बेड पर अज़गर दर्द से तड़प रहा था। चार गोलियों से उसका फौलादी जिस्म छलनी हो चुका था और सफेद चादर खून से लाल थी। उसका चेहरा पीला पड़ चुका था और सांसें