भाग : 10तापस दा के घर का वातावरण कुछ देर पहले की अपेक्षा अब शांत था।बरामदे में बैठे लोगों के सामने चाय के नए कुल्हड़ रखे जा चुके थे। बातचीत का स्वर भी बदल गया था। थोड़ी देर पहले जहाँ शब्दों में तनाव था, अब वहाँ प्रश्न थे—और उन प्रश्नों के भीतर उत्तर खोजने की बेचैनी।लेकिन किसी को पता नहीं था कि बरामदे से कुछ दूर खड़ा वह अनजान व्यक्ति अभी भी गाँव की सीमा पर था।उसने पीछे मुड़कर एक बार तापस दा के घर की ओर देखा।फिर अपनी मुट्ठी में दबे कागज को कसकर पकड़ लिया।और तेज कदमों से