DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 4 Scene 6

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शाम ग़मग़ीन थी। महल में उदासी का सन्नाटा फैला हुआ था। बादलों की गरज की गूंज चारो तरफ़ चक्कर लगा रही थी, और अम्मा साहब अपने कमरे में आराम कर रहीं थी तभी सुरूर ने आकर शेख़ बाबा के आने की ख़बर पहुंचाई। शेख़ बाबा अंदर आकर दीवान पर बैठ गए"इतना परेशान क्यों नज़र आ रहे है बाबा?" अम्मा साहब ने पूछा"मैंने कुसुम को इक़ामतगाह की तरफ़ भेजा था, जिस वक़्त से लौटी है गुमसुम सी है। इस वक़्त वो जल्दी सोती नहीं है। मुझे लगता है उसे उसकी मां याद आ रही हैं।" बाबा ने बताया"उसने कुछ बताया क्या हुआ