"शेख़ बाबा हम्ज़ा की बहन आरामगाह में लाईं जा चुकीं है।" रुक्मणि ने उनके कमरे के दरवाज़े पर से उन्हें ख़बर दिया। हम्ज़ा की गुज़ारिश के मुताबिक़ इन्होंने मुंशीजी के ज़रिए शरबती के साथ उसे महल में लाने का हुक्म दिया था जो पूरा हो गया"वो अम्मा साहब से मिलना चाहतीं हैं।" रुक्मिणी ने आगे बतायाशेख़ बाबा रुक्मिणी के साथ आरामगाह जाने के लिए रवाना हो गए। उन्हें इस रास्ते के बीच महल में ना कोई शक्स दिखाई दिया न ही उन्हें किसी तरह की कोई आवाज़ सुनाई दी। दिन की रौशनी में महल अंदर से रात की तरह गहरी शांति