SCENE 3."इसमें मेरी बेटी की तज़लील क्यों हुई, उसकी क्या ग़लती थी?" रेड कोर्ट पर बैठे हुए कम रंगत की पतली दुबली औरत हरे रंग की सारी शाही अंदाज़ से अरस्ता शेख़ बाबा से रानिया की तरफ़ की शिकायतें करने लगी। जिस क़दर सन्नाटा महल में था, आज उतना ही तेज और शोर कोर्ट रूम में था। मीरास महल के लगभग सारे लोग कोर्ट रूम के बाहर उसके इर्द गिर्द जमा हम्ज़ा की बातें करते हुए उसकी सज़ा के इंतज़ार में थे। अनाबी ने इस वक़्त अपने तरफ़ की शिकायतों कि झोली यहां पलट तो दिया मगर शेख़ बाबा का ध्यान इस