DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 4 Scene 2.

अम्हेल को आवाज़ देते देते मैथिली उसके कमरे की छत पर पहुंच गई "तुम्हें सर्दियों में क्यूं इस क़दर छत पर टहलने का शौक़ है वो भी बग़ैर शॉल, ठंड लग जाएगी तो सारे एहसास सिर्फ़ बिस्तर पर पड़े रहकर करना।" अम्हेल को उसकी बात पर हंसी आ गई, वो उसी देखकर मुस्का दी। मैथिली ने कमरे में से शॉल लाकर कहा "मैं नहीं मना करती तुम्हे मगर शॉल लेकर आया करो ना।" शॉल उसे थमाकर फिर मैथिली ने कहा "शेख़ बाबा ने कहलवाया है की इस मामले की तुम ऐन गवाह हो इसलिए लफ़्ज़ ब लफ़्ज़ कोर्ट रूम में तुम्हे गवाही