ज़िंदगी का सच

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क्या आपने कभी सोचा है कि जब इंसान अपनी ज़िंदगी के आखिरी पड़ाव पर खड़ा होता है, तो उसे सबसे ज़्यादा पछतावा किस बात का होता है? गँवाए हुए पैसों का... या छूटे हुए अपनों का?शहर के सबसे बड़े अस्पताल के कमरे में एक अजीब सी खामोशी पसरी थी। 60 साल की मीना जी खिड़की के बाहर उड़ते हुए परिंदों को एकटक देख रही थीं। डॉक्टर ने अभी-अभी उनके बेटे और बेटी को बाहर बुलाकर साफ शब्दों में कह दिया था कि मीना जी के पास अब बहुत कम वक़्त बचा है।मीना जी अपने ज़माने की एक बहुत ही सफल