एक फरिश्ता

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एक फरिश्तालेखक: विजय शर्मा एरीशहर की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में लोग अक्सर इतने व्यस्त हो जाते हैं कि आस-पास के दर्द को देखना भी भूल जाते हैं। दिल्ली के एक पुराने मोहल्ले में, जहाँ गलियाँ संकरी थीं और मकानों की दीवारें सालों की कहानियाँ समेटे खड़ी थीं, एक छोटा-सा किराये का कमरा था। उस कमरे में रहती थी राधा—एक तैंतीस साल की विधवा औरत। पति की अचानक मृत्यु के बाद उसने दो छोटे बच्चों—आठ साल के आर्यन और पाँच साल की अंशु—को अकेले संभाला था। दिन में वह घरों में काम करती, रात को सिलाई करती और बच्चों को स्कूल