My Shayari Book - 4

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हर कोई क्यों बोलता है उसे भूलने को,मेरा दिल नहीं मानता है उसे भूलने को,कुछ रिश्ते अधूरे होकर भी पूरे लगते हैं,शायद इसलिए वक्त भी हार जाता है उसे मिटाने को.!मेरा मयार नहीं मिलता मैं आवारा नहीं फिरता मुझे सोच कर खोना   मैं दोबारा नहीं मिलता...!पास होकर भी बात ना हो, ये दर्द हमसे पूछो...!हर रोज़ सामने होकर भी ख़ामोश रहना, ये दर्द हमसे पूछो...!जिसे दिल से चाहा, उसी से नज़रें चुरानी पड़ें, ये दर्द हमसे पूछो...!वो दिख भी जाए तो आँखों में आँसू भर आते हैं,और छुपकर ख़ुद को संभालना पड़े, ये दर्द हमसे पूछो...!रातों को रोते-रोते कब नींद आ जाती