रात के दो बज रहे थे।शहर सो चुका था, लेकिन Minakshi की आँखों में नींद का नाम नहीं था।कमरे में अँधेरा था। खिड़की के बाहर सड़क की हल्की रोशनी पर्दे से होकर कमरे में आ रही थी। सब कुछ शांत था, फिर भी उसके भीतर जैसे कोई लगातार बोल रहा था।“तुम ठीक नहीं हो।”“तुम्हें कुछ नहीं होगा।”“कल क्या होगा?”“लोग तुम्हारे बारे में क्या सोचते होंगे?”Minakshi ने आँखें बंद कर लीं।कुछ सेकंड के लिए सब शांत हुआ।फिर वही विचार लौट आए।उसने करवट बदली।मोबाइल उठाया। समय देखा—2:17 AM.उसने खुद से कहा,“बस सो जाओ…”लेकिन दिमाग ने जैसे उसकी बात सुनने से इनकार कर