थोड़ा साथ और वह दिन कब आएगा?एक पति-पत्नी की कहानी… जो सबके लिए जीते-जीते, एक-दूसरे के लिए जीना भूल गए।️ लेखककान्तिभाई राठौड़ 'बदामिया'--- भूमिकाज़िंदगी में हम सबके पास एक सपना होता है—“बस थोड़ा और कमा लें…बस बच्चों की पढ़ाई पूरी हो जाए…बस घर का कर्ज उतर जाए…बस दुकान थोड़ी और चल जाए…बस रिटायर हो जाएँ…फिर आराम से जीएँगे…”लेकिन उस “फिर” का इंतज़ार करते-करतेकई बार पूरी जिंदगी निकल जाती है।हम भविष्य को बेहतर बनाने के लिएआज को खर्च करते रहते हैं।हम घर बनाते हैं,लेकिन उस घर में बैठकर अपनों से बातें करने का समय नहीं निकालते।हम परिवार के लिए पैसा कमाते