खामोशी के पीछे का सच

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रात के 11:30 बज रहे थे। पूरे घर में गहरा सन्नाटा फैला हुआ था, और उस सन्नाटे को चीरती हुई सिर्फ दीवार पर टंगी घड़ी की 'टिक-टिक' की आवाज़ सुनाई दे रही थी।कमरे की लाइट बंद थी, सिर्फ खिड़की से आ रही चाँदनी में रिया का उतरा हुआ चेहरा झलक रहा था। उसकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे। उनकी शादी को 5 साल बीत चुके थे, लेकिन रिया को लग रहा था जैसे ये 5 साल नहीं, बल्कि कोई सदियों पुरानी बात हो। शुरुआती दिनों की वो घंटों लंबी बातें, वो बेवजह की हँसी-मज़ाक, अब सब गायब हो