बांसुरी की धुन - भाग 6

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बांसुरी की धुनभाग : ०६रावण हेंब्रम ने धीरे-धीरे सभा की ओर देखा। उनके चेहरे पर संतोष की हल्की मुस्कान थी। सामने बैठे लोगों की आँखों में अभी भी प्रश्नों की चमक थी।उन्होंने कहा—“मुझे बहुत अच्छा लगा। यहाँ के भक्तवृंद काफी जिज्ञासु हैं। इनके प्रश्न भी उतने ही गहरे हैं। ज्ञान अनंत है और हम सब उस अनंत ज्ञान के पथिक हैं। आज हमने जो समझा है, वह अंतिम सत्य नहीं है। समझने और सीखने की यात्रा निरंतर चलती रहती है।”संध्या अब धीरे-धीरे प्रांगण पर उतर रही थी। दूर पश्चिम के आकाश में सूर्य की अंतिम लालिमा शेष थी। पेड़ों की