इष्ट देवता

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पूजा से आगे, जीवन में उतारने की यात्रालेखकशिवम कुमार पाण्डेयव्यक्तिगत इष्ट देवता: भगवान विष्णुभूमिकासनातन परंपरा में देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा केवल पूजा की एक विधि नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर जीवन को समझने और उसे बेहतर बनाने की प्रेरणा भी हो सकती है। मेरे लिए इष्ट देवता का अर्थ इसी आंतरिक संबंध से है। किसी देवी या देवता को अपना इष्ट मानना केवल उनका चित्र रखना, पूजा करना या उनका नाम लेना नहीं है। इसका अर्थ है उनके जीवन, विचारों और गुणों को स्वयं जानना, समझना और अपनी क्षमता के अनुसार उन्हें अपने जीवन में विकसित करने का निरंतर प्रयास