DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 3 Scene 4.

महल में, जहां कई राज़ को राज़ रखने का ज़िक्र था, वहीं अम्हेल भी राज़ बनकर महल आई थी, और इस बात की जुस्तजू मुंशीजी को हो चुकी थी। मुंशीजी अम्मा साहब की तरफ़ से सौंपी हुई ज़िम्मेदारी पर ग़ौर ओ फिक्र में थे कि इतने सारे लोगो में ये ज़िम्मेदारी उनको ही क्यों मिली। अम्हेल को लेकर मुंशीजी के ख्यालों में बहुत से नए पहलु बन चुके थे। वो ये नही समझ पा रहे थे की अभी अम्हेल को लेकर अम्मा साहब ने बस दो तीन लोगों पर ही भरोसा किया है क्योंकि अम्हेल अभी इस महल के लिए बिलकुल