शीशे के अंदर कैद शेखर ने जब देखा कि उसका हमशक्ल उसकी पूरी दुनिया छीनने जा रहा है, तो उसने समय के उस खौफ़नाक चक्रव्यूह को तोड़ने का एक ऐसा तरीका खोज निकाला... जिसकी कीमत उसकी अपनी जान भी हो सकती थी!शीशे के पीछे की बर्फीली दुनिया में शेखर लाचार खड़ा था। काँच की दूसरी तरफ उसका हमशक्ल शेखर का कोट पहनकर मुस्कुरा रहा था और हवेली का मुख्य दरवाज़ा बंद करके बाहर निकलने ही वाला था।"नहीं! तुम मेरी जगह नहीं ले सकते!" शेखर ने पागलों की तरह शीशे पर घूंसे मारे, लेकिन बाहर कोई आवाज़ नहीं जा रही थी।