स्क्रोल में उलझी ज़िंदगी

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“कभी-कभी हम इसलिए नहीं थकते कि ज़िंदगी बहुत मुश्किल है। हम इसलिए थक जाते हैं क्योंकि हमारा मन शांत रहना भूल चुका है।”कल शाम मैं अपने पसंदीदा शो का सिर्फ एक एपिसोड देखने बैठा। सिर्फ एक। मैंने खुद से पक्का वादा किया था कि चालीस मिनट देखूँगा, थोड़ा मन बहलाऊँगा और फिर सीधे अपने ज़रूरी काम में लग जाऊँगा।लेकिन इससे पहले कि स्क्रीन पर शो शुरू होता, मेरी उँगलियाँ अपने आप चलने लगीं। हाथ ने खुद-ब-खुद फ़ोन उठा लिया।एक रील..फिर दूसरी..फिर किसी का एक मैसेज आ गया...कॉलेज के पुराने दोस्त की छुट्टियों की कुछ तस्वीरें दिखीं। फिर एक ऐसी रेसिपी