"क्या किस्मत वाकई पहले से लिखी होती है? या फिर हमारी एक जिद इसे पूरी तरह बदल सकती है? जानिए कैसे एक छोटे से गाँव के सूरज ने किस्मत के लिखे पन्नों को अपनी मेहनत से दोबारा लिख दिया..."कहानी:गाँव के एक छोटे से कच्चे मकान में शाम होते ही मोमबत्ती की मद्धम रोशनी जगमगा उठती थी। उस रोशनी के बीच बैठा था सूरज। दिनभर राशन की दुकान पर भारी बोरे उठाने के बाद, उसकी रातें किताबों के पन्नों के साथ बीतती थीं। सूरज का सपना बड़ा था—वह प्रशासनिक अधिकारी बनकर अपने परिवार और गाँव की तस्वीर बदलना चाहता था। लेकिन