बब्बू ने ख्वाब में देखा कि बनवाड़ी के झोपड़ी की परछी में कुत्ता ऐसा उछलकूद मचाने लगा, जैसे अजनबियों व चोरों को देख कर संकल से बंधे कुत्ते उछल-कूद मचाया करते हैं।उसकी भौं-भौं की कानफोड़ू आवाज से साहूकार के दामाद की नींद टूट गई, जो दोपहर का खाना खाकर घासफूस की झोपड़ी में बाग की रखवाली करता हुआ आराम फरमा रहा था। वह उठा और बालकों की उम्मीदों के विपरीत बाहर निकल पड़ा।उसकी नजर जैसे ही अमवाड़ी पर पड़ी, वह जोरों से चीखा, ‘‘कौन है यहां?’’इतना सुनना था कि अंदर घुसे चारों लड़के मारे डर के हड़बड़ा गए।बब्बू व मानू,