हम ने उड़ना सीख लिया

  • 195
  • 63

हम ने उड़ना सीख लियालेखक: विजय शर्मा एरीहिमाचल प्रदेश के एक छोटे से पहाड़ी गाँव चंबा की घाटी में, जहाँ सेब के बाग हवा में झूमते थे और रावी नदी गीत गाती हुई बहती थी, एक साधारण सा परिवार रहता था। परिवार का मुखिया रामलाल एक मेहनती किसान था। उसकी पत्नी सीता घर-गृहस्थी संभालती थी और उनके दो बेटे थे—बड़ा बेटा हौंसला और छोटा बेटा अरुण। हौंसला बारह साल का था, पतला-दुबला, लेकिन उसकी आँखों में सपनों की एक अलग ही चमक थी।हर शाम जब पहाड़ों पर सूरज ढलता था, हौंसला छत पर बैठकर आसमान में उड़ते पक्षियों को देखता।