(सुबह का समय। खिड़की से हल्की धूप कमरे में फैल रही है। पर कमरे में शांति नहीं, एक बेचैनी है। सिया करवट बदल रही है। उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ है।)“कभी-कभी सपने वो बताते हैं जो हकीकत छिपा देती है…पर कुछ सपने इतने उलझे होते हैं कि उनमें सच और झूठ का फर्क मिट जाता है…” सपने का दृश्य – (धुंधली रौशनी, सिया सफ़ेद कपड़ों में एक खाली हॉल में खड़ी है।)(चारों ओर अंधेरा, बीच में एक लाल दरवाज़ा है। सिया धीरे-धीरे उसकी तरफ़ बढ़ती है।)सिया (धीरे से, डरते हुए) बोली - “कौन है वहाँ…?”(दरवाज़े के पार से किसी की हल्की