Just A Power System - 4

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चैप्टर 4: आंखों के सामने चमकती सफेद स्क्रीन। समीर के गले में अटका हुआ थूक बहुत मुश्किल से नीचे उतरा। कमरे में पसरा सन्नाटा उसे अंदर तक डरा रहा था। उसने नजरें घुमाकर जमीन पर लेटे अपने भाई को देखा। उसका भाई अभी भी सो रहा था और उसकी नींद में कोई खलल नहीं पड़ा था। समीर ने डरते हुए कमरे के हर कोने में अपनी नजर दौड़ाई। वहां कोई परछाई नहीं थी और ना ही कोई इंसान मौजूद था। उसने हवा में देखते हुए अपनी कांपती आवाज में पूछा। "क... कौन है?" उसकी आवाज दीवार से टकराकर वापस लौट आई। कमरे में कोई भी नहीं था जो उसकी बात