अधूरापन - 23

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अध्याय-२३अमृता और हनी इन चार दिनों में मानो उस खुशी को समेटने और जीने में ही मग्न थीं, जो उन्हें अब तक नहीं मिली थी। भार्गवी भी यह ध्यान रख रही थी कि उन दोनों को एक-दूसरे के साथ बिताने के लिए पूरा समय मिले, इसलिए घर की ज़्यादातर ज़िम्मेदारियाँ वह खुद ही संभाल रही थी। घर का माहौल हनी और भव्या की चहल-पहल और किलकारियों से गूँजने लगा था। रमेशभाई भी बड़े लाड़-प्यार से दोनों बच्चियों को कहानियाँ सुनाते, और उन्हें बारी-बारी से अपनी पीठ पर बिठाकर, घुटनों के बल चलकर घोड़ा-घोड़ा का खेल खिलाते थे। और जब थक