जन्मदिन क्यों मनाऊं

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आज से पांच दिन बाद 15 सितम्बर को मेरा जन्मदिन है। मुझे कोई खुशी ही नहीं हो रही। मुझसे ज्यादा उत्सुकता मेरे बेटे और पतिदेव को हो रही है। मुझे कुछ हो तो नहीं गया। क्या मुझे वैराग्य प्राप्त हो गया। क्या मेरे अंदर किसी योगी की आत्मा प्रवेश कर गई। इतनी नीरस कैसे हो गई मैं। न कुछ पाने की इच्छा है, न कहीं जाने का मन है, सजना-संवरना भी अब अच्छा नहीं लगता। किसी से बोलने या लड़ने को मन ही नहीं करता। क्या मुझे चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। मैं पूरे दिन अपनी ही दुनिया में खोए