अगली सुबह, सूरज की किरणें चौहान हाउस के बड़े कमरों में झांक रही थीं। माहौल में एक नई ताजगी थी, लेकिन संयोगिता के मन में सतर्कता का पहरा अभी भी लगा हुआ था।विवान अपने कमरे में खेल रहा था। संयोगिता उसके लिए यूनिफॉर्म तैयार कर रही थी। उसने ध्यान से उसकी शर्ट के बटन लगाए और बैग चेक किया।तभी काजल कमरे में आई। वह नाश्ते की ट्रे लिए हुए थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी जिज्ञासा और थोड़ी ईर्ष्या भी थी। उसने देखा कि कैसे संयोगिता विवान को प्यार से संवार रही है।काजल बोली - भाभी, विवान की बस