एपिसोड 37 – मेरी हमशक्ल, मेरी बहन“हैलो… दीदी।”उस एक आवाज़ ने पूरे कमरे की हवा रोक दी।Saanvi की आँखें सामने खड़ी लड़की पर जम गईं।वही चेहरा।वही आँखें।वही नाक।वही होंठ।अगर Saanvi को शीशे के सामने खड़ा कर दिया जाता, तो शायद फर्क करना मुश्किल होता।Saanvi ने एक कदम पीछे लिया।“तुम…”उसकी आवाज़ काँप गई।लड़की ने हल्की-सी मुस्कान दी।“हाँ… मैं।”Aryveer की नजरें भी दोनों लड़कियों के बीच घूम रही थीं।Kabir अगर वहाँ होता तो शायद तुरंत कह देता—“भाई, अब तो पहचानने के लिए आधार कार्ड निकालना पड़ेगा।”लेकिन इस वक्त किसी के चेहरे पर मजाक की जगह नहीं थी।राजवीर की आँखों में आँसू थे।वह