रविवार की शाम संयोगिता के घर में काफी चहल-पहल थी।उसके माता-पिता ने घर को अच्छी तरह से सजा रखा था। कुछ ही देर में लड़के वाले आ गए। संयोगिता हल्के रंग की साड़ी पहनकर चाय की ट्रे लेकर कमरे में आई। उसने नजरें झुकाकर सबको चाय दी और सामने जाकर बैठ गई। लड़का भी उसके सामने बैठा था।नवो देखने में काफी हैंडसम था, पढ़ा-लिखा और समझदार भी लग रहा था।लेकिन संयोगिता के मन में पहला ही ख्याल आया—विराट से ज्यादा तो बिल्कुल नहीं।वो खुद अपने इस विचार पर चौंक गई।संयोगिता (मन में) बोली - मैंने विराट से तुलना क्यों की?उसने तुरंत