कलियुग की अग्निपरीक्षा

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कलियुग की अग्निपरीक्षाआज हर इंसान किसी न किसी परीक्षा से गुजर रहा है…कहते हैं कि अग्नि केवल जलाती नहीं, बल्कि सोने को शुद्ध भी करती है।शायद इसी तरह जीवन की कठिनाइयाँ भी इंसान को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि उसे भीतर से मजबूत बनाने के लिए आती हैं।आज किसी के हाथ में तलवार नहीं है, फिर भी युद्ध चल रहा है।किसी के सामने रणभूमि नहीं है, फिर भी संघर्ष है।किसी के शरीर पर घाव दिखाई नहीं देते, फिर भी उसका मन हर दिन घायल होता है।यही है—कलियुग की अग्निपरीक्षा।इस परीक्षा में केवल लड़कियाँ नहीं हैं।लड़के भी हैं।माँ भी है।पिता भी