पुराना गवाह बारिश की टप-टप के बीच मंदिर के अंदर सन्नाटा पसरा हुआ था। विक्रम की निगाहें उस कोने में बैठे आदमी पर जमी हुई थीं। अंधेरे में उसकी आँखें चमक रही थीं—डरावनी नहीं, बल्कि ऐसी मानो वह बहुत कुछ जानता हो और बोलने का सही मौका ढूंढ रहा हो। "तुम कौन हो?" विक्रम ने आवाज दी। आदमी उठा। उसकी उम्र करीब पचास साल रही होगी, चेहरा झुर्रियों से भरा, बाल सफेद हो चुके थे, और उसने एक मोटा पुराना कोट पहना हुआ था जो पूरी तरह भीग चुका था। उसके हाथ में कागज़ों का एक बंडल था—वैसे ही पीले,