एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 11

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भाग ११ — दूरियों के बीच रिश्तेनए शहर में मिहिर को आए हुए लगभग तीन महीने हो चुके थे।शुरुआत में उसे लगा था कि कुछ दिन मुश्किल होंगे, फिर सब आसान हो जाएगा।लेकिन कुछ दूरियाँ ऐसी होती हैं जो समय के साथ कम नहीं होतीं…बस इंसान उन्हें सहना सीख जाता है।हर सुबह मिहिर ऑफिस जाने से पहले घर पर फोन करता।“माँ, पापा ने दवा ले ली?”“हाँ बेटा।”“निशा, बच्चों को स्कूल भेज दिया?”“हाँ।”“आज पापा की तबीयत कैसी है?”“ठीक है।”हर दिन वही सवाल।हर दिन वही जवाब।लेकिन इन छोटी-छोटी बातों में ही उसका पूरा घर बसता था।ऑफिस में मिहिर का काम अच्छा चल