एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 9

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भाग ९ — एक बड़ा फैसलाअगली सुबह मिहिर की आँख खुली तो उसके मन में एक ही बात थी—“क्या मैं फिर से शुरुआत कर पाऊँगा?”पिछले कुछ दिनों में उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी।जिस नौकरी पर उसे गर्व था, वह चली गई थी।जिस भविष्य को उसने सुरक्षित समझा था, वह अचानक अनिश्चित हो गया था।लेकिन अब उसके सामने एक मौका था।नई कंपनी ने उसे दूसरे राउंड के लिए बुलाया था।मिहिर तैयार होकर घर से निकलने लगा।तभी पापा ने पूछा—“कितने बजे लौटेगा?”“पता नहीं पापा। शायद देर हो जाए।”पापा ने सिर हिलाया।“ठीक है।”मिहिर जाने लगा तभी निशा ने उसे रोक लिया।“एक