भाग ८ — खाली जेब और भरा हुआ घरमिहिर घर पहुँचा तो रात के करीब नौ बज चुके थे।दरवाजा निशा ने खोला।मिहिर अंदर आया और बिना कुछ बोले सोफे पर बैठ गया।उसके कंधे झुके हुए थे।चेहरे पर थकान थी।लेकिन सबसे ज्यादा थकान उसके मन में थी।निशा उसके पास बैठी।“खाना लगा दूँ?”मिहिर ने सिर हिला दिया।“मन नहीं है।”निशा कुछ नहीं बोली।वह रसोई में गई और एक गिलास पानी लेकर आई।“पहले पानी पी लो।”मिहिर ने गिलास हाथ में लिया।तभी माँ कमरे से बाहर आईं।उन्होंने मिहिर को देखा।“आ गया बेटा?”मिहिर ने सिर्फ सिर हिलाया।माँ उसके पास बैठ गईं।“क्या हुआ?”मिहिर ने नजरें नीचे कर