भाग ५ — एक पति की खामोशीउस रात मिहिर बहुत देर तक बालकनी में बैठा रहा।शहर की सड़कें धीरे-धीरे शांत हो रही थीं। कुछ गाड़ियाँ अभी भी गुजर रही थीं, लेकिन उसके मन में चल रहा शोर उनसे कहीं ज्यादा तेज था।निशा कमरे में जा चुकी थी।माँ भी अपने कमरे में थीं।पापा टीवी के सामने बैठे थे।घर में सब लोग मौजूद थे…फिर भी मिहिर को लग रहा था कि वह इस घर में अकेला है।उसने मोबाइल उठाया।ऑफिस के कुछ मैसेज पड़े थे।उसने मोबाइल बंद कर दिया।आज उसे किसी से बात करने का मन नहीं था।तभी पीछे से निशा की आवाज