अध्याय-१८भार्गवी अपने ससुर की माला पूरी होने के इंतज़ार में विचारों में डूब गई थी। भार्गवी को अचानक महसूस हुआ कि, अपूर्व सुबह तो बहुत गुस्से में ऑफिस गया था, और घर आया तो एकदम शांत होकर समझदारी से व्यवहार करने लगा है। यह ज़रूर पापा की प्रार्थना का ही फल है। ऐसा सोचकर भार्गवी खुद भी मंदिर में एक दिया जलाकर भगवान को नमन करती है, और मन ही मन कहती है, 'भगवान हमारी तो अभी बहुत ज़िंदगी बाकी होगी, लेकिन मेरे ससुर को तो अब ढलती उम्र में शांति दीजिए।'भार्गवी की आँखें आँसुओं से धुँधली हो गईं। उसकी