रविवार का दिन था। बुआ जी भी अभी रुकी हुई थीं। हम सबने सोचा आज कहीं घूमने चलते हैं। श्रीश , बुआ जी, मम्मी और मैं हम चारों पैदल-पैदल स्टेशन की तरफ जा रहे थे। मम्मी अपने ममेरे भाई के घर ले जा रही थीं जो पास में ही स्टेशन पार करते ही मालती नगर में रहते हैं। फाटक बंद था। अचानक से मेरे विचार में वैदिक किसान फार्म देखने का चित्र उभरा। और मैंने बिना बताए मम्मी और बुआ जी को ई-रिक्शा कर लिया। रास्ता मुझे भी नहीं पता था, रिक्शे वाले को भी नहीं। वैदिक किसान की एक