एक सुंदर हरे-भरे गाँव में रामू नाम का एक बहुत ही गरीब लकड़हारा रहता था। वह बहुत मेहनती और ईमानदार था। उसके परिवार में उसकी बूढ़ी माँ और एक छोटी बेटी थी। रामू रोज सुबह कुल्हाड़ी लेकर जंगल जाता, दिन भर लकड़ियाँ काटता और शाम को उन्हें बाजार में बेचकर जो पैसे मिलते, उससे घर का गुजारा चलाता। उसकी कुल्हाड़ी बहुत पुरानी थी, पर वही उसकी सबसे बड़ी दौलत थी।एक दिन की बात है, गर्मी बहुत तेज थी। रामू नदी के किनारे एक बड़े पेड़ के नीचे लकड़ियाँ काट रहा था। पसीने से उसके हाथ गीले हो गए थे। जैसे