Devil की दास्तान - 39

(रात का सन्नाटा पूरे घर को घेर चुका है। खिड़की से चाँद की फीकी रौशनी कमरे में गिर रही है। सिया बिस्तर पर गहरी नींद में है, उसके माथे पर अब बुखार नहीं — पर चेहरे पर बेचैनी साफ झलकती है।)(सिया खुद को एक पुराने हवेली जैसे स्थान पर देखती है। चारों ओर धुँध, दीवारों पर दीपक जल रहे हैं। हवा में धीमी फुसफुसाहट गूँज रही है।)फुसफुसाहट (धीरे से) बोली - “सिमरन…”(सिया चौंककर चारों ओर देखती है।)सिया (डरी हुई) बोली - “कौन है वहाँ? कौन बुला रहा है मुझे?”(फिर वही आवाज़ — इस बार ज़्यादा करीब से —एक भारी पर दर्द भरी