"इस दरगाह में अगरबत्ती जलाकर जो भी मन्नते मानोगी वो पूरी हो जाएगी बेटा। मालूम नही तुम किस वजह से परेशान हो मगर मेरी बात मानकर देखो तुम्हे सुकून मिलेगा।" एक दरगाह में अम्हेल को मज़ार के पास उदास खड़ा देखकर वहां के पीर बाबा ने उसकी तरफ बढ़कर उसे अगरबत्ती थमाते हुए बताया"मैं ज़रूर करूंगी।" उसे थामकर वो आगे बढ़ गई। पास में खड़ा एक नौजवान काफ़ी देर से अम्हेल की तरफ़ ध्यान दिए खड़ा था, अम्हेल के जाते ही वो पीर बाबा की तरफ बढ़ गया"बाबा, क्या आप इस लड़की को जानते है?""नाजाने कौन है मगर काफ़ी दिन