DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 1 Scene 2

SCENE 2. "........ तुम बाग़ीचे में उसके साथ क्या कर रही थी?............क्या तुमने जानबूझ के ऐसा किया......" उसे वजदान की आवाज़ सुनाई दी उसके बाद बाबाजान और अम्मीजान की ".........मैं उन्हें समझाती रही की बेटी को इतना शेर न करें, उनके जाते ही उनकी तरबियतों को भूल गई है ये.......""........मेरी बेटी शेरनी है, इसे किसका खौफ़.............जब मैं कहता हूं बेगम तो आप मुझे टोकती है अब यही बात आप कह रही है.............मैं तो हक़ीक़त को क़ुबूल कर रही हूं.....""बाबाजान आपने और अम्मीजान ने मिलकर हमें हिम्मती और मज़बूत बनाया था ना....अम्मीजान ऐसी तो नहीं थीं, अब उन्हें क्या हो गया है? वो