बरसात का दिन

  • 2.1k
  • 735

बरसात का दिनलेखक: विजय शर्मा एरीगाँव रामपुर की धरती उस साल मानो प्यासी हो चुकी थी। जून का महीना बीत चुका था, जुलाई का पहला हफ्ता भी निकल गया, पर आसमान से एक भी बूँद नहीं गिरी थी। खेतों में दरारें पड़ गई थीं। मिट्टी इतनी सूख गई थी कि पैर रखने पर धूल उड़ती थी। किसान सुबह से शाम तक आसमान की ओर देखते रहते, पर काले बादल आते और बिना बरसे चले जाते।रामलाल उसी गाँव का एक साधारण किसान था। उम्र पैंतालीस के आसपास। पत्नी सुमित्रा और इकलौती बेटी अंजलि के साथ छोटा-सा कच्चा घर। अंजलि सत्रह साल